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ऐलान ए नवूबत के चंद रोज बाद

ऐलान नबुव्वत के चंद रोज़ बाद नबी-ए-करीम सलअल्लाह अलैहि वसल्लम एक रात मक्का की एक गली से गुज़र रहे थे कि उन्हें एक घर में से किसी के रोने की आवाज़ आई । आवाज़ में इतना दर्द था क...

झूठ का अज़ाब

  *ﺑِﺴْــــــــــــــــــــﻢِﷲِﺍﻟﺮَّﺣْﻤَﻦِﺍلرَّﺣِﻴﻢ* *الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎اللهﷺ* *नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलेही वसल्लम ने फरमाया बंदा जब झूठ बोलता है उ...

एक उस्ताद था वो अक्सर अपने शार्गिदों से कहा करता था कि दीने इस्लाम बड़ा क़ीमती है।

एक उस्ताद था वो अक्सर अपने शार्गिदों से कहा करता था कि  दीने  इस्लाम बड़ा क़ीमती है। ����एक रोज़ एक तालिब-ए-इल्म का जूता फट गया। वो मोची के पास गया और कहा: मेरा जूता मरम्मत कर दो। उसके बदले में , मैं तुम्हें दीने इस्लाम का एक मस्अला बताऊंगा। ����मोची ने कहा: अपना मस्अला रख अपने पास। मुझे पैसे दे। तालिब-ए-इल्म ने कहा: मेरे पास पैसे तो नहीं हैं। मोची किसी सूरत ना माना। और बगैर पैसे के जूता मरम्मत ना किया। ����तालिब-ए-इल्म अपने उस्ताद के पास गया और सारा वाक़िया सुना कर कहा: लोगों के नज़दीक दीन की क़ीमत कुछ भी नहीं। ▶उस्ताद भी अक़लमंद थे: तालिब-ए-इल्म से कहा: अच्छा तुम ऐसा करो: मैं तुम्हें एक मोती देता हूँ तुम सब्ज़ी मंडी जा कर इसकी क़ीमत मालूम करो। ����वो तालिब-ए-इल्म मोती लेकर सब्ज़ी मंडी पहुंचा और एक सब्ज़ी फ़रोश से कहा: इस मोती की क़ीमत लगाओ।  उसने कहा कि तुम इसके बदले यहाँ से दो तीन नींबू उठा लो। इस मोती से मेरे बच्चे खेलेंगे। ����वो बच्चा उस्ताद के पास आया और कहा: इस मोती की क़ीमत दो या तीन नींबू है। ▶उस्ताद ने कहा: अच्छा अब तुम इसकी क़ीमत सुनार से मालूम...